बारिश

बारिश

बादल छाए हैं धुएं का आवरण आसमां को पहनाए हल्की हल्की बारिश की बूंदों से लहकती धरती अपनी बरसों की तृष्णा को तृप्त करने की पुरजोर कोशिश करती। एक तरफ असीम आकाश दूसरी तरफ अथाह पृथ्वी। और इन दो दिग्गजों के बीच विस्मित सी खड़ी मैं निरीह बालक सी परिस्थितियों […]

by April 17, 2014 Hindi Poetry

अंजलि

तेरा तुझको अर्पण करके भी मैं परेशान ऐसा तो हो नहीं सकता। शायद मेरे समर्पण में ही कोई कमी है। इसे पूर्ण करने की एक कोशिश और करूँ या छोड़ दूं इसे बीच राह में असमंजस तू ही सुलझा। चल एक बात तो मानी मेरे दुस्वप्न सच होते हैं। स्वप्नों […]

by April 15, 2014 Hindi Poetry
रचना

रचना

निराशा की गलियों में आशा का पता ढूंढती मेरी बेबस मूक चेतना! आंसुओं के सैलाब में खुशियों का तख्त तलाशती मेरी आहत आत्मिक वेदना! अपाहिजों के संसार में स्वस्थ मन सहेजती मेरी निर्बल लाचार प्रेरणा! कमज़ोर बेल सी मज़बूत पेड़ से लिपटती मेरी ये निशस्त्र मूढ़ रचना!

by April 12, 2014 Hindi Poetry
The Man With The Twisted Lip by Arthur C. Doyle

The Man With The Twisted Lip by Arthur C. Doyle

Everytime I read a Sherlock Holmes story, I feel its the best, most entertaining short fiction I have ever read. But at the very next tale, I am proven wrong as Arthur Conan Doyle keeps coming up with even more engrossing mysterious stories. My latest read ‘The Man With The […]

by April 11, 2014 Review
निद्रा

निद्रा

आंखें मूंदकर नींद का इंतज़ार करना भी एक अजीब सज़ा है। दिमाग सौ की रफ्तार से भाग रहा है दिल जाने किन यादों में डूबे जा रहा है और दिलोदिमाग की इस कशमकश का पूरा फायदा निंदिया रानी उठा रही हैं। जैसे कोई शिशु आनंदित हो इस बात से कि […]

by April 11, 2014 Hindi Poetry
दर्द

दर्द

दर्द श्वेत है दर्द श्याम है बच्चन की रोबीली आवाज़ में ये बात जितनी मार्मिक लगती थी दरअसल उतनी है नहीं। जब कल मेरे पांव में मोच आई तो अहसास हुआ दर्द तो बेरंग है और फिलहाल जल्दबाजी का फल है इसके आगे मूव और झंडु बाम भी फेल हैं। […]

by April 10, 2014 Hindi Poetry
Strange Creatures

Strange Creatures

Strange creatures you have made O God! Everyone seems to be having a Story Worth writing a Novel upon. I wonder how you keep track of So many characters while I struggle with my single Plot. Unable to have steady stream of Thoughts Hats off to you O God! How […]

by April 10, 2014 Poetry
प्रतिबिम्ब

प्रतिबिम्ब

कहते हैं आईना कभी झूठ नहीं बोलता खोल देता है राज़ सारे छुपा के रखे हों जो ज़ख़्म करारे। हम भी बैठ गए इस बात को आजमाने खुद को अपने ही प्रतिबिम्ब से मिलाने। कुछ पल दर्पण में ध्यान से देखा बाल बनाए संवारी चेहरे की रूपरेखा। और फिर झांकना […]

by April 9, 2014 Hindi Poetry