A Poem inspired by a Novel

A Poem inspired by a Novel

Inspiration strikes me in strangest of places. I have just finished an emotionally rocking novel “Out of the Dark” written by Linda Caine and Robin Royston. Though written as a gripping suspense book, it is autobiography of a strong woman Linda Caine, who suffers through severe bouts of depression and […]

by September 1, 2014 Articles, Hindi Poetry

लेखनी

कभी कभी लिखना एक बंदिश सी होती है। जैसे सब बनावट हो कोई खलल है जिसे जी तोड़ पेपर पर उतारने की कोशिश की जा रही है। पर कोई रंग उभर नहीं रहा। कलाकृति को गढ़ने के लिए मूर्तिकार लगातार पत्थर पर वार पे वार किये जा रहा है पर […]

by August 20, 2014 Articles

मन

आज कलम हाथ में आई तो लगा जैसे विचारों का रेला बाँध तोड़ने की फिराक में सजग बैठा है। किसी पहाड़ी नदी सा पूरे उफान पर है। बिना किसी किश्ती का इंतज़ार किये बस कूद पड़ना चाहता है । बिना सोचे समझे कि खिवैया है भी कोई पार लगाने लायक […]

by August 20, 2014 Articles

Poems by Gopal Singh Nepali

आज गोपाल सिंह नेपाली जी की कुछ कविताएँ पढ़ीं। कुछ देशभक्ति से ओत प्रोत मन में नया उत्साह भरने वाली थीं तो कुछ कोमलता से बेटियों के पराया होने की व्यथा सुनातीं। हिमालय के प्रति गर्व भी दिखा उनकी कविताओं में तो राजनीति के झूठे समीकरणों में न उलझने का […]

by August 15, 2014 Uncategorized
Wings in Defender Mag

Wings in Defender Mag

My poem published in July 2014 issue of Defender Magazine

by August 9, 2014 My Published Work
थम जा रे मन

थम जा रे मन

Defender मैगज़ीन में प्रकाशित मेरी कविता : बिजली की रफ्तार से भाग रहा है ये मन पंगडंडियों पर नंगे पांव सरपट दौड़ता। उस ऊंचे शिखर की ओर जहां सुबह सवेरे गोल मटोल सूरज आसमां की गोद से प्रकट होता है आंखों को ठंडक देती लालिमा का स्वर्णिम दृश्य उकेरता है। […]

by July 18, 2014 My Published Work

थक गए बादल भी

थक गए शायद बादल भी उड़ते उड़ते पिघल पिघल धरती पर आ रहे हैं पानी के झीने से परदे की ओट में शर्म से अपना मुंह छुपा रहे हैं। धरा तो है ही स्नेहिल प्रेम भरी नटखट बुलबुलियों को अंक में भर नयी सरगम गा रही है और प्रकृति की […]

by July 13, 2014 Hindi Poetry
पागल चिड़िया

पागल चिड़िया

हल्का नीला आसमां तेज़ी से बढ़ती सुफेद स्याह बदलियाँ कबूतरों की उड़ती पंक्तियाँ पतंगों की उलझती डोरियाँ वेग से झपटती चीलें चलीं छूने ऊंचाईयाँ। शायद बारिश आने वाली है खंभे पर बैठी वो पागल चिड़िया पंख फुला चोंच कटकटा यही चिल्ला रही है या उसे किसी की याद सता रही […]

by July 6, 2014 Hindi Poetry