इंतज़ार की घड़ियां

इंतज़ार की घड़ियां

जब अंधकार हद से गुजर जाए सवेरा नज़दीक होता है। बड़े बूढ़ों ने कहा था। कभी आज़माया नहीं। उठ ही नहीं पाई कभी इतनी सुबह। चैन की नींद सोती रही न हमेशा। पर जब रात आंखों आंखों में गुज़रने लगे तो ऐसी सुनी सुनाई बातों पे ही विश्वास करने का […]

by April 24, 2014 Articles
शब्द : अर्थ

शब्द : अर्थ

आशंकाएं अपेक्षाएं अभिलाषाएं जितने कठिन शब्द उतने ही गहरे मतलब पग भरते ही मंज़िल के दूर होने का डर मंज़िल मिल गई तो देर होने का डर ऊंचाई पर पहुंच फिसल जाने का डर यही तो है न आशंका? कर्म करते ही फल मिलने की आशा बीज बोते ही पेड़ […]

by April 22, 2014 Hindi Poetry
जिज्ञासु

जिज्ञासु

मैं जिज्ञासु हूं। जानना चाहता हूं अपने होने का मतलब। वो एक कारण जिसके लिए मैंने इस धरती पर जन्म लिया। उन लोगों से मिला जो मुझसे अलग थे। उन कामों को किया जो मेरे प्रतिकूल थे जाने अनजाने कितने ही श्रम किए, कितनों से जी चुराया। कितनी ही मृगतृष्णाओं […]

by April 22, 2014 Hindi Poetry
Oscar Wilde : An Inspiration

Oscar Wilde : An Inspiration

I have just begun reading Picture of Dorian Gray and I am bubbling with so many emotions that I could hardly wait to finish it before writing about it. So decided to air my views in this article before they lose steam. Let me begin by saying that Picture of […]

by April 21, 2014 Articles
गीली रेत

गीली रेत

गीली रेत के सीने पर लिखती हूं उंगलियों से अपना नाम खो जाता है अगले ही पल सागर की चंचल लहरों में बिना छोड़े कोई निशां। पर नहीं लील पाता समुद्र भी भीगी बालू के निस्वार्थ प्रेम को उस भोले निमंत्रण को क्षणभंगुर मन के बेबाक यंत्रों को। अपनी हठधर्मिता […]

by April 21, 2014 Hindi Poetry
फूलों की लड़ियाँ

फूलों की लड़ियाँ

लाल पीले फूलों की लड़ियां दीवारों पे लटकती पुरानी जर्जर इमारतें भी नए रंगों में चहकती। जिन बेजान पत्थरों में अपनी याद भी बाकी नहीं पुष्पों के संपर्क से सजीव हो चले ज्यों पैदा ही हुए हों महकने के लिए। बसंत क्या आई रूप ही बदल गया दीवारें बोल उठीं […]

by April 20, 2014 Hindi Poetry
A Change

A Change

Change – Eternal law of nature Forgettable, Incomprehensible A pleasure, An unbearable tragedy A bit like Soft fragrant breeze A bit Seared by Summer Heat! Change – in itself an Exception Commendable, Lamentable Cool like Moon, Hot like Sun Inflamed like Hill Top Oppressed like Earth! Change – Unique confluence […]

by April 20, 2014 Poetry
परिवर्तन

परिवर्तन

परिवर्तन – प्रकृति का शाश्वत नियम विस्मरणीय, अकथनीय सुख की अनुभूति, असहनीय त्रासदी शीतल मंद पवन सा सुगंधित ज्येष्ठ की ऊष्णता से अद्वेलित। परिवर्तन – स्वयं में एक अपवाद प्रशंसनीय, शोचनीय शशि सा शीतल, रवि सा आग्नेय शिखर सा प्रज्वलित धरती सा आरोहित। परिवर्तन – नियति का अनूठा संगम मेरा […]

by April 20, 2014 Hindi Poetry