व्यस्त हूँ

व्यस्त हूँ

व्यस्त हूँ, रहना चाहती हूँ…हर पल, हर घड़ी….फाइलों के ढेर में सिर घुसाए बैठी हूँ …..कंप्यूटर पर बिन आवाज़ दौड़ती उँगलियाँ, शब्दों के आढ़े तिरछे रेखाचित्र उभार रहीं हैं…गर्म चाय का घूँट भरती हूँ…बेख्याली में बिस्किट का छोटा सा टुकड़ा देर तक कप में डूबा रहता है….वो कब ठोस से […]

by May 25, 2016 Fiction
जीने की गूंज

जीने की गूंज

अच्छा लगता है कभी कभी यूं ही खिड़की में खड़े होना उन पेड़ों को हर झौंके के साथ लहराते देखना वो मैना का चहकना कोयल का कूकना गौरैया का फुदकना चीलों का चीखना इन सब आवाज़ों में जीने की गूंज सुनाई देती है न ! Anupama

by May 24, 2016 Hindi Poetry
सागर किनारे

सागर किनारे

सागर किनारे पाँव पाँव चलने का मन है आज… चांदनी रात में नहीँ बल्कि सिखर दुपहरे…. जब हर कोना सूरज की गर्मी से तप रहा हो… दूर दूर तक केवल सुनहली धूप हो…आँखों में चमचमाती किरणें….चेहरे पे पसीने की बूँदें…और मन में नव दिवस की उमंगें… भरपूर जीना है ये […]

by May 23, 2016 Articles
उनींदी

उनींदी

उनींदी अंखियों के पैरहन में लिपटी ख्वाबों की मासूम बूंदें बारिश बन धरा पर आई हैं सौंधी सी खुशबू है घुली सांसों में ढीले से जूडे़ में सहेजे गेसुओं पे बेला की कलियां मुस्काई हैं मई की तपिश को शीतल करती वो काली बदलियां फिर लौट आई हैं ! Anupama

by May 22, 2016 Hindi Poetry
वक्र चाल

वक्र चाल

दोपहर के दो बजे, थके मांदे परिंदे पेड़ों की ऊंची डालियाँ छोड़, नन्ही झाड़ियों में छाँव तलाश रहे हैं… आम के पेड़ पर कच्चे फल अनमने से हैं… गर्मी से उनकी खट्टास का आदान प्रदान जारी है… बोझिल पत्ते हौले हौले मंत्रजाप कर रहे हैं… घरों के दरवाज़े खिड़कियां असहनीय […]

by May 18, 2016 Fiction, Nano fiction
तारे

तारे

आज आसमान एकदम साफ़ नज़र आ रहा है चमक रहे हैं असंख्य तारे जैसे कारी चुनरी पे काढ़़ दिए हों ढेरों सितारे पहले पहल तो बस कुछ सात आठ ही दिखे पर जब ध्यान लगाया तो पाया जग सारा एक के साथ अनेक का लगाते नारा कुछ पास कुछ दूर […]

by May 18, 2016 Hindi Poetry
मौन का कोलाहल

मौन का कोलाहल

कागज़ के पुर्ज़े काले नीले करते चमक उठतीं थीं आँखें अब एक गहरी उदासी है बेरंग मछलियां छटपटाती हैं सिसकियां किनारों से टकरा अपनी ही अनुगूंज में खो जातीं हैं झील धुंधली हो चली प्रतिबिंब झलकते नहीं गर्म हवा के बगूले सरसराते हुए करीब से गुज़र जाते हैं साँसें दो […]

by May 18, 2016 Hindi Poetry
दिल दहल गया आज

दिल दहल गया आज

दिल दहल गया आज बुदबुदाते होंठों से जाने कौन से शब्द उकेरता, वो लगातार उसे घूरे जा रहा था। हाथ में पत्थर लिए आक्रामक मुद्रा में उसका सिर फोड़ने को बिल्कुल तैयार। निरीह जानवर टकटकी बांधे उसे देखता, इस बात से बिल्कुल अनजान कि वो इंसान विश्वास पात्र नहीं। उस […]

by May 17, 2016 Articles