कोरा कागज़

कोरा कागज़

मेरी किस्मत तो तूने बड़े चाव से लिखी थी पर अफसोस तेरी कलम में स्याही नहीं थी तू लिखता गया यूं ही मिटता गया जीवन का कागज़ तो कोरा गया ये बिखरे से सपने वो अनलिखे पन्ने ये बेरंग तस्वीरें वो रूठी तकदीरें मुझको तो बस यही हासिल रहा रूई […]

by October 30, 2014 Hindi Poetry
धोबन

धोबन

बरसों से वो धोबन मेरे घर आती है गठरी में बंधे कपडे़ इस्त्री को ले जाती है नाम नहीं जानती मैं उसका शायद लाडो हो बचपन में या कोई देवी पर मुझे हमेशा से बेटा कहकर ही बुलाती है आज वो कुछ झुकी सी लगी बाल भी कम थे सिर […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
तबाही

तबाही

यूं ही बैठे-बैठे ख्याल आया क्या हो गर बर्फ की चादर बिछ जाए उस तारकोल की सड़क पर क्या हो गर वो सूरज भूल जाए रोज़ पूरब से खिलखिलाना चांद न चमके पूनम पर तारों का खो जाए फसाना शिवली झरना छोड़ दे बरगद की दाढ़ी बढ़ना बंद हो जाए […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
डायरी

डायरी

खोले बैठी हूँ आज वो पुरानी डायरी जिसके कोरे सफहों पर कुछ नज़्में लिखी थीं खो गई थी कुछ रोज़ से पूरा बुकरैक छान मारा था मैंने मिल ही नहीं रही थी आज अचानक टेबल की ड्रॉर में मिली शायद कभी वहाँ रख भूल गई थी मैं भी न चीज़ों […]

by October 28, 2014 Hindi Poetry
पूर्णाहुति

पूर्णाहुति

अ से अनार, आ से आम, इ से इमली, ई से ईख : क्यों, याद आई न वो रंगबिरंगी किताब जिससे अक्षर पढ़ने व लिखने सीखे थे कभी। बोलना तो बहुत पहले आ गया था। आखिर मम्मी-पापा, दादी-दादा से गुड्डे-गुड़ियों, कुत्ते-बिल्लियों के नाम सीख लेने के बाद ही तो जाते […]

by October 27, 2014 Articles, Uncategorized
Self Motivation

Self Motivation

Have you ever wondered how easy it is to spare time to watch your favorite TV serial or attend a coveted party or football match, but losing weight, sticking to your routine or even doing the normal home chores, require extra effort. A thousand things waver around, clamouring for attention […]

by October 27, 2014 Articles
फाईल

फाईल

भोजपुरी पंचायत के अक्टूबर अंक में छपी मेरी पहली कहानी फाईल आरोपों प्रत्यारोपों की कोई सीमा होती है क्या? या फिर ये सोच विचार, समझबूझ निपट जुमले ही हैं जिन्हें हम अपनी सुविधा अनुसार आचरण में लाते और भूल जाते हैं। एक फाईल पर हुआ छोटा सा बवाल किस कदर […]

by October 26, 2014 My Published Work, Uncategorized
रावण

रावण

धू-धू करके रावण के पुतले जलने लगे बुद्धिमान इस पर भी सवाल खड़े करने लगे कहते हैं पुतलों से क्या होगा भीतर का रावण मारो कुंभकर्ण तो भाई सगा था विभीषण को गोली मारो सीता ही नहीं थी पतिव्रता मंदोदरी का गुनगान करो राम ने ऐसा क्या किया आज जो […]

by October 3, 2014 Hindi Poetry