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दीवा

दीवा

“बापू सोड़े में चांदना दीखे है…. दीवे ने फूंक मार दे… दीखना बंद हो जाऊगा” हंसते हुए अपनी भाषा में एक जोक सुनाया उन्होंने, हरयाणवी की खड़ी बोली का स्वाद लेने के बाद मैंने हिंदी रूपांतरण पूछा… वो कहने लगे एक लड़के की रजाई पुरानी हो गयी थी, उसने पिता […]

by January 21, 2017 Kuch Panne
Healing Yourself through Chakras

Healing Yourself through Chakras

Life has an uncanny habit of hitting you, when you least expect it to. I firmly believe that life is nothing but a walk through tough terrains of crazy mountains and ravenous rivers, where peaks are bound to be followed by deep valleys and each ebb would bring a fresh […]

by January 19, 2017 Articles
वास्तविक

वास्तविक

किसी ने कहा ये क्या हर पल फूल पौधों पेड़ों पक्षियों पर लिखती हो कुछ वास्तविक लिखो सड़कों के गढ्ढों पर बढ़ते करप्शन पर विफल हो चुके प्रशासन पर गरीबों के उत्थान पर। हमने भी जुगत भिड़ाई सोचा चलो इनसे भी दो दो हाथ कर लें भाई! विचारने लगे हम […]

by January 18, 2017 Hindi Poetry
बला

बला

“बला” भागते शहर का व्यस्त चौराहा और उसके बीचोंबीच बनी सीमेंट की तिकोनी पट्टी, कबूतरों का जमघट-सा लगा रहता दिनभर। पंछियों को चारा देने से आई बला टल जो जाती है। पर सांझ ढलते ही नज़ारा बदल जाता। मुन्नू चुपचाप झाड़ू ले, बिखरे दानों को समेट लाता। बला की कौन […]

by January 18, 2017 Nano fiction
अक्षर

अक्षर

अक्षर अक्षर बुनते शब्द शब्द चुनते लबों पे मुस्कान लिए मुलायम सपने गुनते अक्सर छप जाते हैं उँगलियों के निशां उन कोरे पन्नों पे छूती हूँ उन्हें प्यार से कलेजे से लगा लेती हूँ बिन कहे बिन लिखे बस इक फ़साना यूँ ही गुनगुना लेती हूँ Anupama

by January 17, 2017 Hindi Poetry

उम्मीदों का दामन

विचारों के रेले को दूर धकेल मनचाहा गन्तव्य सुनिश्चित करती हूँ जबकि भली भांति जानती हूँ कि इस जीवन-रेल की समय सारिणी अनन्त काल से अनियमित है समय घड़ियों में नहीं, मन में बीतता है कितना भागो, कितना पकड़ो, कितना भोगो, कितना सोचो काल दो कदम आगे ही दिखता है […]

by January 16, 2017 Hindi Poetry
कुछ पन्ने 2

कुछ पन्ने 2

अति संवेदनशील मन स्पंज की भांति अपने आसपास होने वाली घटनाओं, बातों, लोगों से प्रभावित हो जाता है.. जाने अनजाने वे सब उसका एक हिस्सा बनने लगते हैं… और हर तरह का प्रभाव अच्छा ही हो, ज़रूरी तो नहीं, तब बेहद ज़रूरी हो जाता है कि आप खुद को आसपास […]

by January 15, 2017 Kuch Panne
कुछ पन्ने 1

कुछ पन्ने 1

मूरत से लगाव हुआ नहीं कभी.. नहीं, नहीं ऐसा नही कि भगवान में विश्वास नहीं…. है, प्रगाढ़ आस्था है और हो भी क्यों नहीं… कहीं सोची पढ़ी है ऐसी शख्सियत, जो सब कुछ खुद करने में सर्वथा समर्थ होने के बावजूद, आपको अपनी मर्ज़ी से सोचने, समझने, चलने, गिरने की […]

by January 15, 2017 Kuch Panne