घड़ी

घड़ी

घड़ियों का बहुत शौक था उसे। दसवीं पास करने पर मिली थी पहली घड़ी। नंबर तो ज़्यादा नहीं आए थे, पर जिसके पास होने के ही लाले पड़े हों, उसके ६० प्रतिशत नंबर आ जाना कोई छोटी मोटी बात तो नहीं। लाईन पर ही सही, लड़के ने पहली डिवीजन छू […]

by May 4, 2016 Fiction
वो कौन थी

वो कौन थी

आज फिर से उन्हीं गलियों से सामना हुआ। वही घूमती सड़कें, वही झूमते पेड़ और वही बूढ़ी अम्मां ! मेरा इस जगह से परिचय काफी पुराना है। एक समय था जब रोज़ यहाँ से गुज़रा करती थी। घंटे भर का सफ़र होता था घर से दफ्तर का। बस यूं ही […]

by May 4, 2016 Uncategorized
यादों की पोटली

यादों की पोटली

यादों की पोटली नहीं होती कि कसकर बाँध दो तो बाहर न छलकें न जादूगर की टोपी सरीखी हैं कि घास चबाता खरगोश या पंख फड़फड़ाता कबूतर निकल आए जब मन चाहे यादें तो शरारती बच्चे सी हैं मनमौजी जितना पीछा करो उतनी तेज़ी सी दौड़ी जायें और जब थक […]

by May 4, 2016 Hindi Poetry
स्मृति

स्मृति

ये मन भी न अजीब है। गर्मियों की इस ऊबाऊ दोपहर में भी शीतल हवाओं से लबालब। याद आ रहा है मुझे वो भीगा सा मंजर जब पहली बार सागर की लहरों को महसूस किया था। सूरज सर पर था। धूप भी तेज। शायद वक्त भी अमूमन यही। पुरी का […]

by May 4, 2016 Articles
दुआ

दुआ

ये भीगी सी ज़मीं ये खुली सी बाहें ये मदहोश हवा ये चिहुँकती घटाएं अब होश में हम रह न सकें हो सके तो दे दवा नहीं तो कर दुआ ! Anupama

by May 4, 2016 Hindi Poetry
अंगड़ाई

अंगड़ाई

सुबह 6 बजे अंगड़ाई लेती उनींदी अँखियों में जब लिशकाते सूरज की किरणें काँटों सी चुभें तो मन करता है न बादलों की चादर सर पे ओढ़ लेने का ! रोम रोम पुकारने लगता है उस शरारती चाँद को जो अपनी ठंडक खुद में समेटे चुपचाप रात्रि के तीसरे पहर […]

by May 4, 2016 Articles
A Rainy Day

A Rainy Day

A Rainy Day तुम अक्सर कहते थे हमारी टाइमिंग मैच नहीं होती। सच भी है.. मैं पूरब हूँ तो तुम पश्चिम। न सोच एक सी न जीने का ढंग। एक जैसे होकर भी कितने जुदा हैं हम। और तो और ये मौसम भी साथ नहीं देता। गर्मी और लू में […]

by May 3, 2016 Fiction
तस्वीर

तस्वीर

इश्क़, प्रेम, प्यार, मुहब्बत कभी सोचा इनमें एक अक्षर एक आखर, एक लफ्ज़ हमेशा अधूरा क्यों ? क्योंकि ये जज़्बात कसक, ललक, आस हैं रूह की, खोज अपने संपूरक की तलाश एक प्रतिबिम्ब, एक अक्स की जो इक दूजे में समा ज़िन्दगी की तस्वीर मुक़म्मल कर सकें Anupama

by May 3, 2016 Hindi Poetry